सुबह व शाम की मसनून दुआएं (तर्जुमा व फ़ज़ीलत)
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أَصْبَحْنَا وَأَصْبَحَ الْمُلْكُ لِلَّهِ، وَالْحَمْدُ لِلَّهِ لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ وَحْدَهُ لَا شَرِيكَ لَهُ
मुख़्तसर जवाब / ख़ुलासा
सुबह के वक़्त यह दुआ पढ़ने से इंसान हर बला और शर से महफ़ूज़ रहता है...
तहक़ीक़ व तफ़्सील
तर्जुमा: "हमने सुबह की और तमाम मुल्क ने अल्लाह के लिए सुबह की, और सब तारीफ़ें अल्लाह के लिए हैं। अल्लाह के सिवा कोई माबूद नहीं, वह यकता है उसका कोई शरीक नहीं।"
फ़ज़ीलत: हुज़ूर अकरम ﷺ सुबह और शाम इन दुआओं का एहतिमाम फ़रमाते थे। जो शख़्स सुबह 3 मर्तबा 'बिस्मिल्लाहिल्लज़ी ला यदुर्रु मअस्मिही शैउन' पढ़े, उसे शाम तक कोई चीज़ नुक़सान नहीं पहुंचा सकती।
अमल करने की बातें
Amal kareinइस इल्म को अपनी रोज़मर्रा की ज़िन्दगी और इबादतों में शामिल करें।
Share kareinहदीस व शरई मसाइल को अपने घर वालों और दोस्तों के साथ शेयर करें।
Dua kareinइल्म पर साबित क़दमी और नेक अमल की तौफ़ीक़ के लिए दुआ मांगें।
Ulema se ruju kareinकिसी पेचीदा मसले की सूरत में अहले सुन्नत के मुफ़्ती-ए-किराम से राब्ता करें।